OUR HISTORY

ॐ नमो गोभ्यः |

व्रज कामद सुरभि वन एवं शोध संस्थान की स्थापना गोऋषि परम पूज्य स्वामी श्री दत्तशरणानंद जी महाराज, पथमेड़ा,परम पूज्य महामंडलेश्वर कार्ष्णि स्वामी श्री गुरुशरणानंद जी महाराज,परम पूज्य श्री किशोरदास देव जी महाराज, गोरीलाल कुञ्ज,श्रीधाम वृन्दावन, परम पूज्य  गीता मनीषी ज्ञानानंद जी महाराज एवं महामंडलेश्वर परम पूज्य श्री रामप्रवेशदास  जी महाराज, बारह घाट, श्री धाम वृन्दावन की पावन प्रेरणा से परमपूजनीय श्रीमज्जगद्गुरु द्वाराचार्य मलूकपीठाधीश्वर श्री राजेंद्रदास देवाचार्य जी महाराज के संरक्षण में हुई है | इस सुरभि वन का एकमात्र उद्देश्य सम्पूर्ण व्रज के गोवंश का संरक्षण एवं संवर्धन करना है | यह स्थल भगवान् श्रीकृष्ण की लीला भूमि ब्रज चौरासी में स्थित है | संतों की ऐसी मान्यता है की यह वही स्थल है जहाँ पर द्वापर युग में प्राणाराध्य ठाकुर श्रीकृष्ण-बलराम ने गोचारण किया था|

श्री जडखोर गोधाम, भगवान श्री कृष्ण की भूमि –  ब्रज ८४ कोस के अन्तर्गत ‘प्रतिज्ञा वन’ में वो स्थान हैं

जहां श्रीठाकुर जी ने अपने बाल सखाओ के साथ नित्य गोचारण तथा कई बाल लीलाए की थी, जिनके प्रमाण आज भी जडखोर की गुफाओ में पाए जाते है.

संत महापुरुषों के अनुसार यही ठाकुर जी ने किशोरी श्री राधा रानी के समक्ष बृजवासियों को न छोड़ने, न विसारने की, नन्द बाबा की नाम की सौगंध खायी थी –

“ब्रजवासी बल्लभ सदा मेरे जीवन प्राण

इन्हें छोड़ नहीं जाउंगो मोहे नन्द बाबा की आन “

इस क्षेत्र में आने पर मन को अलौकिक अनुभूति होती है

सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति का मूल आधार गोमाता ही है और भारतवर्ष का अस्तित्व भी गो पर ही आधारित है| गोवंश भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था का मेरुदंड है उसकी सेवा और रक्षा प्रत्येक नागरिक का परमधर्म है| भगवान् श्रीकृष्ण की ब्रज भूमि जहाँ करोड़ों की संख्या में गोवंश हुआ करता था आज मात्र २-३ लाख में सिमट कर रह गया है| गाय बचेगी तो देश बचेगा / विश्व बचेगा|

इस वन में करीब ५२ बीघा जमीन ट्रस्ट के नाम से पंजीकृत हो चुकी है और  २१ बीघा जमीन श्री राजेश अग्रवाल मॉडल टाउन दिल्ली ने ट्रस्ट को दान में दी है | ट्रस्ट के पास कुल ७३ बीघा जमीन हो चुकी है जिस पर शेड,भूसाघर,पानी की टंकी , संतों की कुटियाओं का निर्माण हो चुका है|

यह गौशाला राजस्थान सरकार से पंजीकृत है जहाँ से इस वर्ष ५७ लाख ६२ हजार की राशि का अनुदान मिला है | अभी गौशाला में करीब ५०००  गोवंश है | जिनका महीने का खर्च ७५ लाख और वार्षिक खर्च ९ करोड़  है | गौशाला में विभिन्न प्रकल्प और यह सब कार्य ठाकुर जी की प्रेरणा से गो-भक्तो के सहयोग से चल पा रहा है | आप इस भगवत्सेवा कार्य में ट्रस्टी बनकर या सेवा का कोई भी प्रकल्प लेकर सहयोग कर सकते हैं |

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